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21 हजार पानी-पूरी से बनी 13 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा, दो महीने में हुई तैयार

Kavita2
14 Sept 2026 4:41 PM IST
21 हजार पानी-पूरी से बनी 13 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा, दो महीने में हुई तैयार
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पुणे। गणेशोत्सव के दौरान अपनी अनूठी सजावट और रचनात्मकता के लिए प्रसिद्ध पुणे में इस बार पानी-पूरी के हजारों खोल से भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा बनाई गई है। शहर के फर्ग्यूसन रोड पर स्थित ‘गणेश भेल’ प्रतिष्ठान ने 21 हजार पानी-पूरी का इस्तेमाल करके करीब 13 फीट ऊंची और 11 फीट चौड़ी गणपति प्रतिमा तैयार की है। खानपान की एक लोकप्रिय सामग्री से बनाई गई यह प्रतिमा श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए विशेष आकर्षण बन गई है।

यह अनोखी गणेश प्रतिमा नामदार गोपाल कृष्ण गोखले पथ पर स्थित दुकान के बाहर स्थापित की गई है। इस मार्ग को आम तौर पर फर्ग्यूसन रोड या एफसी रोड के नाम से जाना जाता है। सड़क से गुजरने वाले लोग प्रतिमा को देखने के लिए रुक रहे हैं और मोबाइल फोन से तस्वीरें तथा वीडियो बना रहे हैं। पानी-पूरी के गोल आकार वाले खोल को कलात्मक ढंग से जोड़कर तैयार किए गए गणपति के स्वरूप ने लोगों का ध्यान खींचा है।

उपलब्ध शुरुआती जानकारी में प्रतिमा की चौड़ाई 10 फीट बताई गई थी, लेकिन प्रकाशित स्थानीय विवरण के अनुसार इसकी चौड़ाई करीब 11 फीट है। प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 13 फीट बताई गई है। इसकी संरचना तैयार करने के लिए बांस, कागज और अन्य सहायक सामग्री का भी इस्तेमाल किया गया है।

गुडमेवार परिवार ने किया अनावरण

मूर्ति का अनावरण गणेश भेल के संस्थापक रमेश गुडमेवार ने किया। इस अवसर पर उनकी पत्नी छाया गुडमेवार, निदेशक रूपेश गुडमेवार और दिनेश गुडमेवार तथा अनुष्का गुडमेवार सहित परिवार एवं प्रतिष्ठान से जुड़े लोग मौजूद रहे। ढोल-ताशों और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच मूर्ति को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला गया।

आयोजकों का कहना है कि इस कलात्मक पहल का उद्देश्य गणेशोत्सव के धार्मिक उत्साह में रचनात्मकता का नया रंग जोड़ना है। इसके साथ पानी-पूरी जैसे लोकप्रिय व्यंजन को कला के माध्यम से प्रस्तुत करने की कोशिश भी की गई है। मूर्ति का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि दूर से देखने पर इसका भव्य स्वरूप दिखाई देता है, जबकि पास से देखने पर पानी-पूरी के हजारों खोलों से की गई बारीक सजावट नजर आती है।

दो महीने पहले शुरू हुई थी तैयारी

इस विशेष प्रतिमा की तैयारी गणेशोत्सव से करीब दो महीने पहले शुरू कर दी गई थी। मूर्ति के लिए इस्तेमाल किए गए पानी-पूरी के खोल प्रतिष्ठान की अपनी उत्पादन इकाई में बनाए गए। इससे सभी पूरियों के आकार और गुणवत्ता में एकरूपता बनाए रखने में मदद मिली।

मूर्ति तैयार करने की जिम्मेदारी कलाकार प्रशांत सालुंखे को दी गई थी। उनके मार्गदर्शन में करीब 11 कारीगरों और सहयोगियों की टीम ने इस परियोजना पर काम किया। सबसे पहले बांस और दूसरी सामग्री से गणेश प्रतिमा का मूल ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद पानी-पूरी के खोलों को सावधानी से अलग-अलग हिस्सों में लगाया गया।

पानी-पूरी के खोल बहुत हल्के और नाजुक होते हैं। दबाव पड़ने या नमी के संपर्क में आने पर उनके टूटने की आशंका रहती है। ऐसे में हजारों पूरियों को जोड़कर 13 फीट ऊंची संरचना तैयार करना कलाकारों के लिए चुनौतीपूर्ण काम था। प्रत्येक खोल को इस तरह लगाया गया कि प्रतिमा का आकार संतुलित रहे और गणपति का स्वरूप स्पष्ट दिखाई दे।

विशेष प्रक्रिया से सुरक्षित रखी गईं पूरियां

आयोजकों के अनुसार, मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल की गई पूरियों को एक विशेष प्रक्रिया से गुजारा गया है, ताकि वे गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षित रहें। नमी और मौसम का असर कम करने के लिए सहायक उपचार किया गया है। दावा है कि प्रतिमा को लगभग 12 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

हालांकि खाद्य सामग्री से बनाई गई संरचना होने के कारण इसके संरक्षण में विशेष सावधानी बरती जा रही है। बारिश, हवा और कीड़ों से बचाने के लिए प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर लगाया गया है। गणेशोत्सव पूरा होने के बाद इस्तेमाल की गई सामग्री का उचित तरीके से निपटान करने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

आयोजकों ने इसे प्राकृतिक और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया है। प्रतिमा के मुख्य स्वरूप में पानी-पूरी के खोलों का उपयोग किया गया है, जबकि आधार के लिए बांस और कागज जैसी सामग्री इस्तेमाल की गई है।

लगातार चौथे साल अनोखी थीम

यह लगातार चौथा वर्ष है जब गणेश भेल की ओर से अलग सामग्री और विषय पर आधारित गणपति प्रतिमा तैयार की गई है। इससे पहले भी प्रतिष्ठान ने नमकीन और विशेष प्रकार की पूरियों का इस्तेमाल कर रचनात्मक प्रतिमाएं बनाई थीं। इस वर्ष आयोजन के लिए पानी-पूरी थीम चुनी गई।

गणेश भेल की शुरुआत वर्ष 1978 में एक छोटी हाथगाड़ी से हुई थी। बाद में यह प्रतिष्ठान पुणे के प्रसिद्ध चाट ब्रांड के रूप में विकसित हुआ। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अब इसके देशभर में 25 से अधिक आउटलेट हैं। गणेशोत्सव पर खानपान की सामग्री से प्रतिमा बनाने की पहल को ब्रांड अपनी परंपरा और रचनात्मकता से जोड़कर देखता है।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

प्रतिमा के अनावरण के बाद बड़ी संख्या में लोग गणपति के इस अनोखे स्वरूप का दर्शन करने पहुंचे। बच्चों और युवाओं में इसे लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। कुछ लोग पूरियों की संख्या और उन्हें जोड़ने की तकनीक के बारे में जानकारी लेते नजर आए।

पुणे का गणेशोत्सव अपनी सार्वजनिक झांकियों, ऐतिहासिक मंडलों और सामाजिक संदेशों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस बार 21 हजार पानी-पूरी से बनी प्रतिमा ने उत्सव में खानपान, कला और आस्था का अलग संगम प्रस्तुत किया है। दो महीने की मेहनत से तैयार यह गणपति प्रतिमा अब फर्ग्यूसन रोड के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गई है।

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